Uttarkashi Cloudburst : ऑपरेशन जिंदगी जारी, अब तक 274 लोगों का किया गया रेस्क्यू

Uttarkashi Cloudburst

Uttarkashi Cloudburst : उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भयंकर जल प्रलय ने भारी तबाही मचाई है। इस तबाही के बीच ऑपरेशन जिंदगी लगातार जारी है। संकटग्रस्त जगहों पर फंसे लोगों को बचाने के लिए इस ऑपरेशन को और भी तेज कर दिया गया है। बता दें कि इस ऑपरेशन के तहत अब तक 274 से ज्यादा लोगों को बचा लिया गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से उत्तरकाशी घूमने आए पर्यटकों को हेलीकॉप्टर की मदद से देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सुरक्षित ले जाया गया है। अभी तक जिन लोगों को आपदा से बचाया गया है, उनमें सबसे ज्यादा पर्यटक गुजरात से हैं।

पर्यटकों को जिस हेलीकॉप्टर से देहरादून भेजा गया है। उसका नाम चिनूक बताया जा रहा है। यहां से सभी पर्यटकों को उनके घर भेजा जाएगा। इन पर्यटकों को धराली समेत आसपास की जगहों से निकाला गया है। एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार, जिन 274 लोगों को आपदा से निकाला गया है, उनमें से 131 पर्यटक गुजरात और 123 महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। यूपी के 12, मध्य प्रदेश के 21, राजस्थान के 6, असम के 5, दिल्ली के 7, कर्नाटक के 5, पंजाब व तेलंगाना के एक-एक पर्यटक का रेस्क्यू किया गया है।

इस पर आईटीबीपी ने बताया कि गंगोत्री से कुल 307 श्रद्धालुओं का रेस्क्यू किया गया है। आपदा स्थल से निकालकर मुखवा भेज दिया गया है। वहां से उन्हें हर्षिल के लिए रवाना किया जाएगा।

Uttarkashi Disaster : धराली में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

भीषण बाढ़ से धराली गांव पूरी तरह से तबाह हो चुका है। ऐसे में ऑपरेशन को तेज करने के लिए मशीनों का जल्द-जल्द से वहां पहुंचना बहुत जरूरी है। इन मशीनों की मदद से ही दबे हुए लोगों को ढूंढ़ा जाएगा। लेकिन टूटी सड़कों और मलबे के ढेर के कारण ऑपरेशन में काफी दिक्कत आ रही है।

इस पर राज्य आपदा मोचन बल के महानिरीक्षक अरुण मोहन जोशी का कहना है कि, ‘इस वक्त हमारी प्राथमिकता है कि उन्नत उपकरणों को आज  ही आज में हवाई मार्ग से मौके पर पहुंचा दिया जाए। उपकरणों के साथ बुधवार को हमारी जो टीम आपदा स्थल पर आ रही थी, वो सड़कों के बाधित होने की वजह से आगे ही नहीं बढ़ पाई।’

जोशी का कहना है कि धराली में करीब 50 से 60 फुट ऊंचा मलबा फैला हुआ है। अनुमान लगाया जा रहा है कि कई लापता लोग उसी के नीचे दबे हुए हैं। इस कार्य में बचाव कर्मियों के साथ उन्नत उपकरण उनकी सहायता करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी दूसरी प्राथमिकता यह है कि अवरूद्ध मार्गों की वजह से जो श्रद्धालु अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए है, उन्हें बाहर निकाला जा सके। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों की संख्या करीब 300 से 400 तक हो सकती है।