Donald Trump ने भारत पर ही क्यों लगाया मोटा टैरिफ, इन धंधों पर पड़ेगा गहरा असर

Donald Trump

अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का इस पर कहना है कि यह फैसला भारत के बाजार में अमेरिकी कंपनियों पर ज्यादा टैक्स लगाने और रूस से तेल खरीदने की वजह से लिया गया है। वहीं इस पर पीएम नरेंद्र मोदी का कहना है कि हम भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं कर सकते, फिर चाहें हमें इसकी कितनी ही बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।

लेकिन अमेरिकी टैरिफ नीति से देश के कुछ प्रमुख उद्योगों को तगड़ा झटका लग सकता है। ये वो कारोबार हो सकते हैं, जिनसे देशवासियों को बड़ी संख्या में रोजगार हासिल होता है। ऐसे में इन्हें कोई झटका लगा तो एक बार फिर से देश की इकॉनमी चिंता का विषय बन जाएगी।

Donald Trump की टैरिफ नीति से किसका फायदा?

इस टैरिफ से चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों को सीधा फायदा होगा। खासतौर पर चीन को होने वाला फायदा तो खुद अमेरिका पर भी भारी पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि टैरिफ लगेगा तो भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ेगी और उनकी तुलना में बांग्लादेश और चीन जैसे देशों को हर छोटी-छोटी चीजों के एक्सपोर्ट में बढ़त हासिल होगी। अब चिंता की बात यह है कि भारत में ऐसे कई उद्योग है, जिनके कुल निर्यात में अमेरिका 40 से 60 प्रतिशत तक हिस्सेदार है। ऐसे में टैरिफ से इन उद्योगों की तो कमर ही टूट जाएगी।

इन उद्योगों पर पड़ेगा असर

हम सबसे पहले स्मार्टफोन्स की बात करते हैं। इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग के बाद अमेरिका में इनका कुल निर्यात सालाना 10.6 अरब डॉलर है। अगर हम पूरी दुनिया की बात करें तो उसका करीब 43.6 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका को ही जाता है। इसके अलावा सोना, हीरा और अन्य उत्पादों का भी करीब 40 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका ही ले जाता है।

फार्मा सेक्टर में भी अमेरिका की 39.8 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इस तरह पेट्रोलियम उत्पादों में 4.3 प्रतिशत, मशीनरी उपकरणों में 20 प्रतिशत, टेक्सटाइल में 50 प्रतिशत, स्टील और एल्युमिनियम में 16 प्रतिशत निर्यात अकेले अमेरिका को ही किया जाता है।

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बिल्कुल इसी तरह वस्त्र उद्योग के साथ भी है। वस्त्र उद्योग भी लगभग 30 प्रतिशत का है। इतना ही नहीं वाहनों के पार्ट्स के निर्यात में भी अमेरिका की 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कारपेट के एक्सपोर्ट में अमेरिका की 58.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। ये सिलसिला यहीं नहीं रुकता गद्दे और फर्नीचर में भी अमेरिका की 44 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

अब तक टैरिफ की मार इन उद्योगों पर पड़ती है तो फिर भारत के उद्योगों पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है। दरअसल, चीन और भारत दोनों ही मैन्युफैक्चरिंग हब है। जब यहां से यूरोप और अमेरिका को एक्सपोर्ट होता है तब अर्थव्यवस्था लाइन पर चलती है। अब अगर एक्सपोर्ट पर ही चोट दी गई तो इकॉनमी धराशाही हो सकती है।