Ganesh Chaturthi 2025 : देशभर में गणेश उत्सव पूरे धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू पांचांग के अनुसार, इस उत्सव को हर साल कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाते हैं। लेकिन इन सब में भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को काफी खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन से गणेश जी पूरे दस दिन के लिए घर आते हैं और सभी को अपना आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में इन गलतियों को करने से बचना चाहिए। ताकि आपको आपकी पूजा का पूरा फल मिले।

गलत दिशा में कभी ना रखें मूर्ति
जब गणेश जी की मूर्ति को लाते हैं तो उन्हें कभी गलत दिशा में नहीं रखना चाहिए। उनकी मूर्ति को गलत दिशा में रखने से पूजा का फल कम होता है। वास्तु के अनुसार, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में मूर्ति को रखें। मूर्ति को दक्षिण दिशा में रखने से बचें, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। मूर्ति को सही दिशा में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

चंद्र दर्शन ना करें
माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए, इससे मिथ्या दोष लगता है। पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश जी का चंद्रमा ने मजाक उड़ाया था, यही कारण है कि इस नियम को बनाया गया है। यदि गलती से आपकी नजर चंद्रमा पर पड़ भी जाए तो ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जप करें।

खंडित मूर्ति की ना करें पूजा
गणेश चतुर्थी पर खंडित या टूटी मूर्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित होती है। हमेशा पूजा के लिए सही आकार वाली और सुंदर मूर्ति का चयन करें। पूजा से पहले मूर्ति की अच्छी तरह से जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि कहीं से टूटी तो नहीं है। उसके बाद ही उसकी पूजा करें।

गणेश जी पर बासे फूल ना चढ़ाएं
गणेश चतुर्थी पर पूजा के लिए बासे फूलों का इस्तेमाल ना करें। उससे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पूजा के लिए और पूजा स्थल को सजाने के लिए खिले हुए और ताजे फूलों का ही उपयोग करें, इससे पूजा में सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है व मन शांत रहता है।

गलत प्रसाद का भोग ना लगाएं
तामसिक भोजन जैसे मछली, मांस या लहसुन-प्याज वाले भोजन का भोग गणेश जी को ना लगाएं। गणपति जी को सबसे ज्यादा मोदक, लड्डू और फल पसंद हैं। उनके खाने में तुलसी पत्र का भी इस्तेमाल ना करें, क्योंकि गणेश जी को यह नहीं चढ़ाया जाता। उन्हें सात्विक भोग लगाएं, इससे पूजा का फल बढ़ता है।

मूर्ति को शयनकक्ष में ना रखें
शयनकक्ष में गणेश जी की मूर्ति को रखना वास्तु दोष उत्पन्न करता है। इससे अशांति और मानसिक तनाव हो सकता है। मूर्ति को ड्रॉइंग रूम, पूजा घर या मुख्य द्वार के पास ही स्थापित करें। ये सभी स्थान सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। पूजा सामग्री को भी शयनकक्ष में ना रखें।

साफ-सफाई को बिल्कुल नजरअंदाज ना करें
गणेश चतुर्थी पर ध्यान रखें कि पूजा स्थल की साफ-सफाई जरूर की जाए। पूजा स्थल पर गंदगी होने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। मूर्ति स्थापना से पहले पूजा स्थल को गंगाजल से छिड़ककर शुद्ध करें। सही ढंग से फूल, दीपक और धूपबत्ती सजाएं ताकि पूजा का प्रभाव और बढ़े।

पूजा गलत समय पर ना करें
गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना और पूजा शुभ मुहूर्त पर ही करें। पंचांग के अनुसार निर्धारित समय या सुबह का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम है। मूर्ति स्थापना या पूजा रात में करने से बचें, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त में गणपति जी की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

सम्मान के साथ करें गणेश जी का विसर्जन
11 दिन के बाद गणेश जी मूर्ति का विसर्जन पूरे सम्मान के साथ करें। कूड़ेदान या गंदे पानी में मूर्ति को न फेंकें। इसे समुद्र या नदी में ही विसर्जित करें, यदि ऐसा ना सके तो मंदिर में मूर्ति को सौंप दें। विसर्जन के समय लगातार ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जप जरूर करें। सम्मान के साथ विसर्जन करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है।






