राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया के अलग-अलग देशों पर लगाए गए टैरिफ को अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने अवैध करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप की व्यापार नीति पर जोरदार हमला माना जा रहा है और अब इस पर सुप्रीम कोर्ट में अगली कानूनी लड़ाई होने की संभावना है।
यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट (वाशिंगटन डीसी) ने अपने 7-4 के फैसले में कहा, “राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में कानून राष्ट्रपति को कई कदम उठाने की अनुमति देता है, लेकिन इनमें कहीं भी टैरिफ या शुल्क लगाने का कोई स्पष्ट अधिकार नहीं दिया गया है। न ही उन्हें किसी भी देश पर कर लगाने का अधिकार है।”
अदालत ने कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत ट्रंप ने अपनी सीमाओं का अतिक्रमण किया। इस कानून का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से संपत्ति जब्ती औक प्रतिबंधों के लिए किया जाता रहा है।
Also Read : Donald Trump ने भारत पर ही क्यों लगाया मोटा टैरिफ, इन धंधों पर पड़ेगा गहरा असर
इन टैरिफ पर कोर्ट ने लगाई रोक
अप्रैल में लगाए गए रेसिप्रोकल ड्यूटीज पर यह फैसला लागू होगा, जिन्हें अपने व्यापार युद्ध के एक हिस्से के तौर पर ट्रंप ने लागू किया था। यह फैसला फरवरी में मैक्सिको, कनाडा, और चीन पर लगाए गए टैरिफ पर भी लागू किया जाएगा। हालांकि, अलग कानूनों के तहत एल्युमीनियम और स्टील जैसे अन्य टैरिफ जो लगाए गए थे, उन पर इस फैसले का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
ट्रंप प्रशासन ने यह दलील दी थी कि IEEPA के तहत उन्हें आयात को रेगुलेट करने का अधिकार और टैरिफ लगाने का अधिकार है। लेकिन अदालत ने उनके इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कानून में शुल्क या टैरिफ का कहीं भी उल्लेख नहीं है और न ही इसके लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है।
डोनाल्ड ट्रंप ने फैसले के कुछ समय बाद ही इसे Truth Social पर अमेरिका के लिए एक आपदा बताया। उन्होंने लिखा, “यदि ये टैरिफ खत्म कर दिया जाता है तो यह देश की एक तरह से तबाही होगी। अगर यह फैसला लागू रहा तो अमेरिका बर्बाद हो जाएगा।” उन्होंने अपील अदालतों पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट जरूर उनके पक्ष में ही फैसला देगा।
इस पर कुश देसाई जो कि वाइट हाउस के प्रवक्ता है, उन्होंने अपने एक बयान में कहा, “फिलहाल राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ लागू रहेंगे और हमें पूरा विश्वास है कि इस मामले में अंततः हमें जीत हासिल होगी।” अदालत ने 14 अक्टूबर तक के लिए अपने फैसले को रोक दिया है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए ट्रंप प्रशासन को समय मिल सके।






