Delhi NCR में कुत्तों पर क्यों मचा घमासान, कितनी बढ़ चुकी है इनकी तादाद

delhi stray dogs

Delhi NCR में कुत्तों को लेकर घमासान मचा हुआ है। इस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि दिल्ली एनसीआर से सभी लावारिस कुत्तों को हटा दिया जाए और उन्हें आश्रय स्थलों पर ले जाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अब से लावारिस कुत्ते सड़कों या गलियों में ना दिखाई दें।

अदालत ने ये दिशा निर्देश आवारा कुत्तों द्वारा काटने से होने वाली बीमारी रेबीज पर गंभीर चिंता जताते हुए दिए। इस आदेश आने के बाद से ही इसके विरोध और समर्थन में आवाजें उठने लगीं। बता दें कि दिल्ली में कुत्तों की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है और हर साल कई सारे लोग इनका शिकार हो जाते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक, राजधानी में 10 लाख से अधिक आवारा कुत्ते हैं। 16 साल पहले दिल्ली में सर्वे हुआ था। उस वक्त कुत्तों की संख्या करीब 60 हजार निकली थी। उसके बाद साल 2016 में पूर्ववर्ती दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने चार जोन में आवारा कुत्तों का सर्वे किया। तब 1 लाख 89 हजार कुत्तों की संख्या सामने आई थी।

साल 2019 में विधानसभा द्वारा गठित उप-समिति के अनुमान के मुताबिक कुत्तों की आबादी 8 लाख पाई गई। इसके बाद से ही निगम प्रशासन पिछले दो साल से कुत्तों के सर्वे की बात तो करता है, लेकिन सर्वे किया नहीं अब तक। यह अनुमान लगाया जाता है कि राजधानी में अब आवारा कुत्तों की आबादी 10 लाख के आसपास पहुंच चुकी है। इसके अलावा राज्य में लाखों की संख्या में पालतू कुत्ते भी हैं।

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इस अस्पताल में होता है रेबीज का टीकाकरण

हर साल दिल्ली में एक लाख से ज्यादा ऐसी खबरें आती है, जिनमें कुत्तों ने लोगों को अपना शिकार बनाया होता है। दिल्ली के तीन बड़े अस्पतालों की बात करें तो तीनों में कुल मिलाकर 91009 कुत्तों के काटने के केस सामने आए। इसके अलावा हजारों लोग कई निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में रेबीज का टीका लगवाते थे। रोजाना सफदरजंग में 700-800 लोग रेबीज का टीका लगवाने के लिए पहुंचते हैं। पहले रेबीज के टीके के लिए हर रोज 500 लोग पहुंचते थे। बता दें कि इस अस्पताल में 24 घंटे रेबीज के टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है।

डर के साए में लोग

दिल्ली में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कुत्तों के कारण लोगों ने घरों से बाहर निकलना तक बंद कर दिया है। कई जगहों पर जहां बच्चे खेल रहे होते हैं, वहां अचानक आवारा कुत्ते बच्चों पर हमला कर देते हैं। जिससे वे घायल हो जाते हैं। यही कारण है कि वे कुत्तों के कारण अपना रास्ता तक बदल देते हैं। कुत्तों के काटने के कारण अब बुजुर्ग भी घर के बाहर बैठने से डरने लगे हैं।